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नई माताओं के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने की यà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤
अगर आप अपने शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ कर रही हैं, तो तो आपने उसके लिठसबसे बेहतरीन विकलà¥à¤ª चà¥à¤¨à¤¾ है।
अगर आपको सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• रूप से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने में कà¥à¤› कठिनाई हो रही है, तो चिंता न करें। बहà¥à¤¤ सी नई माताओं को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने में माहिर होने के लिठअà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ और दृढता की जरà¥à¤°à¤¤ पड़ती है।
कà¥à¤¯à¤¾ यह सच है कि माठका दूध शिशॠके लिठसरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® है?
हां। माठका दूध शिशॠके लिठसरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ आहार है। शिशॠको आहार देने का सबसे सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤§à¤• तरीका उसे सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना है।
सà¥à¤¤à¤¨ दूध à¤à¤• संपूरà¥à¤£ आहार है। इसमें कम से कम 400 पोषक ततà¥à¤µ होते हैं। साथ ही इसमें हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ और बीमारियों से लड़ने वाले यौगिक पदारà¥à¤¥ à¤à¥€ शामिल होते हैं, जो फॉरà¥à¤®à¥‚ला दूध में नहीं ​पाठजाते। जैसे-जैसे शिशॠबढ़ता और विकसित होता है, तो उसकी जरà¥à¤°à¤¤ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मां के दूध की पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• मातà¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ होती जाती है।
अपने शिशॠको विशेषकर छह महीनों तक केवल सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध पिलाना (à¤à¤•à¥à¤¸à¤•à¥à¤²à¥‚सिव बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग) उसके लिठबहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ है। यह शिशॠका बौदà¥à¤§à¤¿à¤• विकास बेहतर करता है। इसलिà¤, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ शिशॠको बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ à¤à¥€ बना सकता है।जिन शिशà¥à¤“ं को जनà¥à¤® से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराया जाता है, उनकी जीवन के पहले वरà¥à¤· में बीमार पड़ने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बहà¥à¤¤ कम होती है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ से आपके शिशॠको निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित बीमारियों से बचाव में मदद मिल सकती हैः
मà¥à¤à¥‡ कब तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाना चाहिà¤?
विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन (डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚.à¤à¤š.ओ.) और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ की सलाह है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को उनके पहले छह महीनों में सिरà¥à¤« माठका दूध दिया जाà¤à¥¤ इसे अननà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ (à¤à¤•à¥à¤¸à¤•à¥à¤²à¥‚सिव बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग) कहते है। वे यह à¤à¥€ कहते हैं कि ठोस आहार शà¥à¤°à¥‚ करने के बाद à¤à¥€ शिशॠके पहले साल के अंत तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जारी रखना चाहिà¤à¥¤ अगर आप चाहें, तो इसे आगे à¤à¥€ जारी रख सकती हैं। विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन शिशà¥à¤“ं को दो साल तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने की सलाह देता है।
ठोस आहार का सेवन शà¥à¤°à¥ करवाने के बाद à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जारी रखने से शिशॠकी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को फायदा पहà¥à¤‚च सकता है। उसकी सीलिà¤à¤• डिजीज़ और टाइप 1 मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ जैसी सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ विकसित होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ काफी कम हो सकती है।
अधिकांश माà¤à¤‚ शिशॠको छह से 12 महीनों तक सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराती हैं, वहीं कà¥à¤› शिशॠके à¤à¤• साल का हो जाने के बाद à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जारी रखती हैं (à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥‡à¤‚डेड बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग)। काफी कà¥à¤› आपकी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ को लेकर आपकी सोच पर निरà¥à¤à¤° करता है।
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